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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 5
न्ययोजयदयं राजा यत्र यत्र निजे दृषी। तत्र तत्राभवन् मेरुसदृशाः स्वर्णराशयः ।॥
उस राजा ने जहां जहां अपनी दृष्टि घुमाई वहां वहां मेरु पर्वत की तरह स्वर्ण राशि उत्पन्न हो गई।
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