न यद्यपि नरेन्द्रस्य तत्र सिद्धांजनांचिते। तदप्यद्धा निधानानि पश्यतः स्म विलोचने ।।
वहां उस राजा की आंखों में सिद्धांजन डाला हुआ नहीं था, फिर भी उसे दबाए गए खजाने दिख गए।
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