निक्षेपस्वर्णसम्पूर्णकटाहजठरां धराम्। खलान्तकः स खनकैरनेकैः समखानयत् ।।
सोने के निक्षेप द्वारा परिपूर्ण कढ़ाईयाँ भूमि में दबाकर रखी हुई थी ऐसी भूमि को उस दुष्टों का विनाश करने वाले (शिवाजी) ने अनेक खोदने वालों के द्वारा खुदवाई।
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