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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 27
अथ कृतजयघोषग्रस्तमेघस्वनानां विलसदसिलतानां हन्तुमेवोद्यतानाम्। प्रतिपदमविहस्ताः सन्निपाते रिपूणां सुमहति कृतहस्ताः सैनिकास्तं ररक्षः ॥
तब स्वयं की हुई जयघोषों की ध्वनियों ने मेघ की गरजना को ग्रसित कर लिया जिनके हाथों में तलवारे चमक रही है एवं जो पग पग पर मारने के लिए उद्यत हैं ऐसे शत्रु के विशाल भीड़ में विचलित ना होने वाले एवं उत्तम धनुर्धारी सैनिकों ने उसकी रक्षा की।
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