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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 26
प्रतिहतरिपुशूरप्रस्रवद्रक्तपूरः, प्रचुरसमरशोभासुध्रुवः कर्णपूरः। स मृधमधिविरेजे तानजिन्मल्लसूरः समजनि निशि तस्यां तेजसा यस्य सूरः ।।
मृत्यु को प्राप्त हुए शत्रु पक्ष के वीरों के रक्त से परिपूर्ण एवं अनेक युद्ध रूपी सुंदरियों के कान का आभूषण वह तानाजी मालुसरे युद्ध में शोभायमान हो रहा था एवं उसके तेज से उस रात्रि में सूर्य उत्पन्न हो गया था।
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