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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 25
इत्युक्त्वा दृषदि निबध्य रज्जुखंडेः तं तस्तं निजसविधे स्थिरं विधाय। आत्मीयां सपदि स तत्र शौर्यशक्ति शूरेभ्यः पदि पदि दर्शयन् ननर्त ।।
इस प्रकार बोलकर उस भयभीत पिलाजी को अपने समीप रस्सी से पत्थर पर सुदृढ़ बांधकर वहां अपने पराक्रम को पग पग पर प्रदर्शित करता हुआ नाचने लगा।
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