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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 22
संजातवेपथुममुं भृशमुच्छसंतं, विन्यस्तपाणिगकृपाणमपद्रवंतम्। सद्यः स्वयं कतिपयानि पदानि गत्वा धृत्वा करे न्यगकरोत् किल मल्लसूरः ॥
कंपन से युक्त अत्यधिक श्वास प्रश्वास लेने वाले हाथ की तलवार को नीचे फेंक कर पलायन करने वाले और पिलाजी को शीघ्र कुछ ही पलों में माल सुरेश ने स्वयं हाथ से पकड़ लिया एवं उसका धिक्कार किया।
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