उच्चकैः श्रवणगोचरीकृतं पन्नगारय इवाहिफूत्कृतम्। तत्तदायुधभूतो न सेहिरे तानजित्प्रभृतोऽस्य गर्जितम् ।।
गरुड़ जैसे नाग के फुंकार को सहन नहीं करता है उसी प्रकार कानों में पड़ी हुई उसकी प्रचंड गर्जना को उस समय तानाजी प्रवृत्ति योद्धाओं ने सहन नहीं किया।
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