स बद्धमुष्टिभिस्तैस्तैरविद्वैश्चिरपालिताम्। स्वहस्तमनयत् सद्यः श्रियं राजपुरस्थिताम् ।।
उन-उन लोभी अविन्धों द्वारा दीर्घकाल तक संग्रहित की हुई राजपुर के संपत्ति को तत्काल उसने अधीन कर लिया।
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