अथाभिमानैकधनः प्रभावी स भूपतियेदिलशासनेन। दधी धियं वैरमयीं मदेन करीव सिंहेन समं शिवेन ।।
तब उस अत्यंत अभिमानी एवं पराक्रमी राजा ने आदिलशाह की आज्ञा से जैसे हाथी अभिमान से सिंह से द्वेष करता है वैसे ही अभिमान से शिवाजी से शत्रुता की।
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