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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 16
कवीन्द्र उवाच - भग्नपूर्वाः शिवेनैव रुस्तुमाद्याश्चमूभृतः । प्रभविष्यन्ति नो योद्धमिति चिन्तयता स्वयम्।। येदिलेनाटवीमध्यवर्ती पत्तिबलान्वितः । स एव दुष्करेऽप्यस्मिन् कार्ये किल नियोजितः ।।
कविंद्र बोला - शिवाजी ने पहले पराजित किए गए रुस्तम आदि सेनापति उनसे युद्ध करने में समर्थ नहीं होंगे, इस प्रकार से मन में विचार करके वन के मध्य भाग में रहने वाले एवं पदातियों से युक्त उस राजा को दुष्कर कार्य होते हुए भी नियुक्त कर दिया।
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