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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 13
आस्तामिदमिदानीं तु त्वमस्मदपकारिणम्। समुडूतं परावृत्तं निरुत्स्वाभ्यर्णमागतम् ।।
ठीक है या इस समय रहने दो। अब वह हमारा उन्मत्त शत्रु लौटकर हमारे समीप आया है अतः उसे जानकर रोक दो।
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