कवीन्द्र उवाच -
स विरोधी किलास्माकं व्रजन् राजपुरं प्रति। न निरुद्धस्त्वयां तस्मिन् वनमार्गे सुदुर्गमे।।
कविंद्र बोला - वह हमारा शत्रु जब राजपुर की और जा रहा था तो उसको अत्यंत दुर्गम अरण्य के मार्ग में तूने क्यों नहीं रोका?
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