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शिवभारतम् • अध्याय 30 • श्लोक 11
मनीषिण उचुः - विद्राव्याविद्धपृतनां द्रुतं दाल्भ्यपुरं जितम्। तथैव चित्रपुलिनं पुरं निजकरे कतम् ।। गृहीतं चाप्रयासेन नगरं संगमेश्वरम्। अहो राजपुरं सर्वमापातालं च खानितम् ।। गृहीताः संचयाः सर्वे निगृहीताश्च नागराः। तथाक्रियत सामर्थ्यात् करदः सरितां वरः ।। शिवराजेन विद्वेषात् राष्ट.. मेवमुपप्लुतम्। अवेत्य येदिलस्तत्र कमुपायमचिंतयत्।।
पंडित बोले - मुगलों की सेना को भगाकर शिवाजी ने दाभोल शीघ्र ले लिया उसी प्रकार चिपकूण अपने अधीन कर लिया और संगमेश्वर को तो अनायास ही ले लिया। अहो! संपूर्ण राजपुर को भी पाताल पर्यंत खोद डाला सभी खजाने ले लिए और नागरिकों को कैद किया उसी प्रकार अपने सामर्थ्य से समुद्र को अपने अधीन कर लिया इस प्रकार शिवाजी ने द्वेष से संपूर्ण देश व्याप्त कर लिया यह जानकर उस समय आदिलशाह ने कौन सा उपाय किया?
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