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शिवभारतम् • अध्याय 3 • श्लोक 9
दृष्ट्वा यादवराजाद्याः प्रणिपत्य यथाक्रमम्। प्रचलन्ति स्म तरसा सर्वे स्वं स्वं निवेशनम्।।
तब यादवराज जैसे सभी सरदार उनसे मिलजुलकर और मुजरा देकर शीघ्रता से अपने घर जाने लगे।
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