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शिवभारतम् • अध्याय 3 • श्लोक 5
एते क्षोणिजये सक्ताः शक्तास्समरकर्मणि। निजामस्य प्रियकराः कराकृष्टशरासनाः ।।
पृथ्वी पर विजय पाने के लिए आतुर, युद्ध कार्य में सक्षम, निजामशाह से प्रेम करने वाले, सदैव हाथ में धनुष धारण करने वाले,
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