गाढमुष्टिर्गाढमुष्टिं समुद्यम्य स यादवः ।
संरब्धोभ्यपतत्तूर्णं संभं समरदुर्जयम्।।
क्रोधित हुए गाढमुष्टि यादवराज ने तलवार निकालकर समरांगन में अपराजेय उस संभाजी पर वेगपूर्वक प्रहार किया।
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