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शिवभारतम् • अध्याय 3 • श्लोक 32
तदा स्वमण्डलाग्रेण मण्डलानि वितन्वता। ननृते तेन बीरेण रणरंगे महीयसि ।।
तब वीर दत्तवर्मा अपने तेजोमय मण्डलों से मण्डलों का विस्तार करता हुआ वह विशाल युद्ध के मैदान पर नृत्य करने लगा।
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