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शिवभारतम् • अध्याय 3 • श्लोक 30
ततश्चर्मधरस्तत्र दत्तराजः प्रतापवान्। व्यधत्त मण्डलाग्रेण परिवेषमिवात्मनः ।।
तब हाथ में ढाल लिए हुए पराक्रमी दत्तवर्मा ने अपनी तलवार को घुमाकर मानो अपने चारों ओर एक तेजोमय मण्डल बना दिया हो।
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