अथ यादवराजस्थ दत्तवर्मादिभिस्सुतैः ।
न सेहे गर्जतस्तस्य गर्जः प्रतिगजैरिव।।
जब किसी एक हाथी के दहाड़ने पर जैसे दूसरे झुण्ड के हाथी उसे सहन नहीं कर पाते; उसी तरह इस हाथी की दहाड़ यादवराजा के पुत्र दत्तवर्मा आदि को सहन नहीं हुई।
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