मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 61
हत्वा म्लेच्छबलं स्वबाहुविभवैराक्रम्य तन्मण्डलम्। शक्रश्रीः शरणागतायः सदयः सद्यः प्रदायाभयम्।। धत्ते पोतवणिग्जनैर्धनदतां यस्यांतिके सागरः । तस्मिन् राजपुरे व्यराजततरां राजाधिराजः शिवः ॥ इत्यनुपुराणे सूर्यवंशे कवीन्द्रपरमानन्दप्रकाशितायां शतसाहश्यां संहितायां स्वपुरप्रवेशो नाम एकोनत्रिंशोऽध्यायः ॥
अपने बाहुबल से यवन सेना का विनाश करके तथा उनके प्रान्तों को अधीन करके एवं शरणागतों को अभयदान देकर वह इन्द्र की तरह, दयालु, राजाधिराज शिवाजी समुद्र पर आश्रित व्यापारियों को समुद्र ने धनवान् बनवाया ऐसे राजपुर में वह विराजमान हो गया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें