अपने बाहुबल से यवन सेना का विनाश करके तथा उनके प्रान्तों को अधीन करके एवं शरणागतों को अभयदान देकर वह इन्द्र की तरह, दयालु, राजाधिराज शिवाजी समुद्र पर आश्रित व्यापारियों को समुद्र ने धनवान् बनवाया ऐसे राजपुर में वह विराजमान हो गया।
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