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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 60
अथ पुन्नागबकुलप्रसूनप्रायसौरभम्। नागवल्लीनाळिकेरक्रमुकप्रायभूरुहम्।। दैवतप्रायभूभागं द्विजन्मप्रायमानवम्। आरामप्रायभूमीघ्रं तीर्थप्रायनदीनदम् ।। तं देशं सपदि स्वीये निदेशे विनिवेशयन्। अयं राजवरो राजपुरं जित्वा व्यराजत।।
तत्पश्चात् पुन्न एवं बकुल के फूलों से सुगंधित, नागलता, नारकी एवं केरेलु के पने वृक्षों से युक्त, अनेक देवताओं से युक्त, जहाँ बस्तियां ब्राह्मण परिवारों से युक्त है, उद्यानमय पर्वतों से युक्त, प्रायः तीर्थमय नदी एवं नदों से युक्त ऐसे उस प्रदेश को शीघ्र अपने अधीन करके एवं राजापुर को जीतकर वह श्रेष्ठ राजा सुशोभित होने लगा।
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