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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 59
गुप्त्यर्थमस्य देशस्य तिष्ठन्ती संगमेश्वरे। अनीकिनी मामकीना श्रृंगारपुरवर्तिना ।। काम त्वयावेक्षणीया यावदागमनं मम। वैमत्यं परिहर्तव्यं कर्तव्यं मदुदीरितम् ।। इत्थं संदेशमाप्तेन दूतेन स नृपस्तदा। प्रभावलीभूते भूमिपालाय समदेशयत्।।
श्रृंगारपुर में रहने वाला तू इस देश के रक्षणार्थ संगमेश्वर में रहने वाली मेरी सेना पर मेरे आने तक अच्छी प्रकार से नियन्त्रण रख शत्रुता त्याग दें एवं मेरे द्वारा बताएं गए कर्तव्यों का पालन कर ऐसा संदेश विश्वासयुक्त दूत द्वारा प्रभावली के राजा को उस राजा ने उस समय भेज दिया।
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