स तत्र भार्गवक्षेत्रे दानशौंडो दयान्वितः। क्षिप्रदत्तेन वित्तेन विप्रवृंदमनन्दयत्।।
उस दान निपुण एवं दयालु शिवाजी ने उस परशुराम क्षेत्र के ब्राह्मण श्रेष्ठ को तत्काल धन देकर संतुष्ट किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।