अथ दाल्भ्यपुरे राजा यथार्हमधिकारिणम्। निधाय सज्जं युद्धाय वीरं च द्विसहस्रिणम् ।। व्रजन्नभयदानेन प्रीणयन्नभयार्थिनः। अपश्यच्चित्रपुलिनं पुरं त्रिचतुरैर्दिनैः ॥
तत्पश्चात् दाभोळ में योग्य अधिकारी को नियुक्त करके एवं युद्ध के लिए सज्ज ऐसे दो हजार वीरों को रखकर आगे बढ़ रहा था तो अभय मांगने वाले को अभयदान से संतुष्ट करके शिवाजी राजा तीन-चार दिन बाद चिपळुण चला गया।
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