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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 49
तदा पल्लीवनपतिर्जसवंतो महाभुजः । स्मरन् कृतचरां स्वेन जोहरसू सहायताम्।। दुर्विनीतान्तकात् भीतः शिवादभ्यर्णवर्तिनः । प्रपेदे शरणं सद्यः श्रृंगारपुरनायकम्।।
तब पाली को, राजा महाबाहु जसवंत स्वयं पहले की गई सिद्दी जोहर की सहायता को स्मरण करके दुष्टों के यमराज शिवाजी को समीप आया हुआ देखकर भयभीत होकर तुरन्त उसने श्रृंगारपुर के राजा का आश्रय ले लिया।
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