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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 46
क्रमेण क्रममाणोऽसौ पुरग्रामाचलाटवीः। पश्यन् रिपुभिरुत्सृष्टास्तुष्टिमाधत्त भूयसीम्।।
क्रमपूर्वक आगे जाते समय नगरों, गांवों, किलों एवं अरण्यों को शत्रुओं द्वारा परित्यक्त हुआ देखकर वह अत्यन्त संतुष्ट हो गया।
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