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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 43
प्रणालाद्रिप्रतिनिधिं द्रुतमादित्सतो मम। उद्यमः सा एवायं फलितो भविता न न ।।
पन्हाळगड़ का शीघ्र प्रतिशोध लेने का इच्छुक जो मैं उस प्रयत्न के तत्काल सफल हुए बिना स्थिर नहीं रहूँगा।
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