परावृत्ता एव परे न परावृत्तिकारिणः । इति त्वया न मन्तव्यं ताम्रास्ते द्वाभिमानिनः ॥
युद्ध में कभी भी पीठ न दिखाने वाले शत्रु वापस चले गये हैं, ऐसा मत समझो क्योंकि मुगल अभिमानी होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।