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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 4
अद्ययावद् यशो यावदिन्द्रप्रस्थभूतार्जितम्। तत्तस्य भवतामुष्मिन् विपिने विनिमज्जितम्।।
आज तक दिल्लीपति ने जितना यश प्राप्त किया था, वह उसका सारा यश तूने इस अरण्य में डुबो दिया।
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