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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 35
कर्णाभरणलुब्धेन छिन्नकर्णश्च कश्चन। स्वकण्ठाभरणं सद्यो मुक्तामणिमयं जहौ।।
किसी ने कर्णाभूषणों के लालच से कान छिन्न करवा लिए तो किसी ने शीघ्र मोतियों एवं रत्नों से जड़ित कण्ठाभूषण त्याग दिए।
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