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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 22
जनकः शाहराजस्ते महाराजो महामतिः। यवनेऽप्यन्वहं स्नेहमपारमकरोन्मयि ।।
आपके पिता, महामति, महाराज शहाजी राजे उनका मैं यवन होते हुए भी मेरे पर अपार स्नेह था।
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