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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 21
तुंगारण्यादपि धनं सह्यारण्यमिदं तव। महार्णवसमेऽमुष्मिस्त्वमस्मच्छरणं भव ।।
यह आपका सह्याद्री का अरण्य तुंगारण्य की अपेक्षा घना है। महासागर के समान इस अरण्य में आप हमारी रक्षा करें।
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