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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 20
तलातलमिवासाद्य सह्याचलतलस्थलम्। विररामश्चिरं चित्ते विस्मरामच पौरुषम्।।
सह्याद्री के पाताल के समान गहरे तल को प्राप्त करके हमारा मन दीर्घकाल तक स्तब्ध रहे एवं पराक्रम भी विस्मृत हो गया है।
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