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शिवभारतम् • अध्याय 29 • श्लोक 2
राजव्याघ्री उवाच - अंकरोपितसैन्यस्त्वमकरोः कर्मगर्हितम्। प्राविशः सहसा येन शिवसिंहाश्रयं वनम् ।।
राजव्याघ्री बोली - शिवाजी रूपी सिंह के आश्रय से युक्त वन में सेना के साथ जो प्रवेश किया है, यह तूने निन्दित कार्य किया।
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