एवं स यवनस्तत्र राजव्याघ्रया प्रबोधितः । विरराम महावीरः साहसी समरात्ततः ।।
इस प्रकार रायबगीन ने उस महावीर एवं साहसी यवन को वहां प्रेरित किया तो उसने युद्ध रोक दिया।
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