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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 8
मनीषिण उचुः - नायं त्वया निहतव्यो मंतव्यो मन्त्र एष मे। निमित्तमन्यदेवास्य जोहरस्य विनाशने ।।
पंडित बोले - 'इसको मत मार' इस मेरी बात को तू मान्य कर, इस जोहर के नाश करने के पीछे भिन्न ही निमित्त हैं।
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