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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 76
प्रतिभयतमां वन्यामेतां सरोपयेमुयुषाम्, त्यजति न भृशं युद्धावेशं बलं बहलं द्विषाम्। सपदि भवता सर्वोऽप्यध्वा तदस्य निरुध्यताम्, इति शिवमहीपालः सेनापतिं स्वमवोचत ।।
अत्यन्त भयंकर इस वन में क्रोध से आयी हुई शत्रुओं की सेना अपने प्रबल युद्ध के आवेश को नहीं छोड़ रही है, अतः शीघ्र ही उसके सम्पूर्ण मार्ग को तुम रोक दो, इस प्रकार शिवाजी ने सेनापति से कहा।
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