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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 73
अथ भृशमविहस्तस्तत्र कोतारगर्भेऽभिनवसुभटशोभाधाम धीरो धनुष्मान्। प्रतिनरपतिसैन्यं सादयन् सायकौधैः समरममरसिंहो भूषयामास भूरि।।
तब उस अरण्य के मध्यभाग में उस युवा योद्धा के तेज का घर ही हो ऐसे धैर्यवान् धनुर्धारी अमरसिंह ने विचलित न होते हुए अरण्य के मध्यभाग में बाणों की वर्षा करके शत्रुसेना का संहार करते हुए युद्ध को सुशोभित कर दिया।
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