तब तुंगारण्य का अधिपति महाबाहु वीर मित्रसेन घोड़े से उतरकर, उन्नत स्थान पर स्थित होकर, अपने वीरों को साथ लेकर तथा वीरासन में स्थित होकर, धनुष को झुकाकर उन पर बाण लगाकर शत्रुओं के विनाश के लिए उनको सज्ज किया, उसी प्रकार अमरसिंहादि दूसरे योद्धा भी युद्ध में खड़े हो गये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।