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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 71
तदा तुंगारण्यपतिर्मित्रसेनो महाभुजः। अवतीर्य हयात्तूर्णमबलंब्योन्नतां भुवम् ।। स्वीयैः परिवृतो वर्वीरैर्वीरो वीरासने स्थितः । न्युब्जीकृतेषुधिस्तत्र शरसंधानतत्परः ॥ चापमारोपयांचक्रे परांतकरणोद्यतः। अन्येऽप्यमरसिंहाद्यास्तस्थुः स इव संयते ।।
तब तुंगारण्य का अधिपति महाबाहु वीर मित्रसेन घोड़े से उतरकर, उन्नत स्थान पर स्थित होकर, अपने वीरों को साथ लेकर तथा वीरासन में स्थित होकर, धनुष को झुकाकर उन पर बाण लगाकर शत्रुओं के विनाश के लिए उनको सज्ज किया, उसी प्रकार अमरसिंहादि दूसरे योद्धा भी युद्ध में खड़े हो गये।
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