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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 67
तेन राजन्यवीरेण पूर्वमेव नियोजितान्। तत्र तत्र स्थितानेत्य भागयोरुभयोरपि ।। सन्नद्धान् पत्तिमूर्धन्यांस्तां वन्यामन्तरान्तरा। नाविदन्नुपकण्ठस्थानपि दिल्लीन्द्रसैनिकाः ।॥
उस वीर द्वारा पूर्व नियोजित पदातियों के सज्जनायकों के आकर उस घने अरण्य में दोनों तरफ से समीप ही स्थित हो जाने पर भी उन दिल्लीपति के सैनिकों को ज्ञात नहीं हुआ।
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