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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 61
मनीषिण उचुः - तां वन्यामाविशन्तस्ते द्विषन्तः शिवभूपतेः । अनालोकमयं लोकं पश्यामः स्मेति मन्वते ।।
पण्डित बोले - उन झाड़ियों में प्रविष्ट होने वाले शिवाजी के शत्रुओं को हमने अंधकारमय लोक देख लिया, ऐसा प्रतीत हुआ।
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