ततः स जोहरं दृष्ट्वा तस्मै पृष्ट्वाप्यनामयम्। सुतरां सत्कृतस्तेन शिवसौहृदकांक्षया ।।
तत्पश्चात् जोहर से मिलकर उसने उससे कुशलक्षेम पूछा और शिवाजी के स्नेह प्राप्ति की इच्छा से उसने उसका अत्यंत सत्कार किया।
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