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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 58
अहंकारपरः कारतलबः स्वबलान्वितः । हंतारं नैव हन्तारं कान्तारं तु व्यलोकत ।।
अपनी सेना के साथ आने वाले उस अभिमानी कारतलब ने अपने शत्रु को शीघ्र नहीं देखा किन्तु वनमात्र देखा।
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