अथ पन्थानमाश्रित्रू लोहाड्रेर्दक्षिणोत्तरम्। वीतभीः स वतारेभे सहाशैलावरोहणम्।।
तत्पश्चात् लोहगड़ के दक्षिणोत्तर मार्ग का आश्रय लेकर वह निर्भयता के साथ सह्याद्रि से अवतरण करने लगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।