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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 48
सह्यजयः सह्यपतिः सह्यस्याक्रमणं विना। नैवास्मद्धशतां गन्ता हन्ताहंकारसंयुतः ।।
सह्याद्रि पर आक्रमण किये बिना वह दुर्जेय एवं अभिमानी सह्याद्रिपति हमारे हाथों में नहीं आयेगा।
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