कवीन्द्र उवाच -
स कारतलबं नाम यवनं कार्यकारिणम्। पुरस्थितं समाहूय मिथः एतदभाषत।।
कवीन्द्र बोला - सामने स्थित कारतलब नाम के कार्यकर्ता यवन को बुलाकर उसे एकान्त में इस प्रकार कहा।
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