सचिवानामिति वचो निशम्य समयोचितम्। स धन्यचरितः सम्यगमन्यत महामतिः ।।
सचिव के उस समयोचित वचन को सुनकर उस महाबुद्धिमान् एवं पुण्यशील राजा को वह सम्यक् प्रतीत हुआ।
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