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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 41
अभिद्रवन्ती सह्याद्रेर्यथा सा नावरोहति । तावत्तथा विधातव्यमथान्यदपि सर्वथा।।
सह्याद्री से चलकर आने वाली सेना जिस प्रकार से नीचे अवतरण न कर सकें, उसी प्रकार का प्रयत्न करना चाहिए। पुनः दूसरा सब कुछ करना चाहिए।
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