किन्तु सम्प्रति दिल्लीपति का मामा सेनापति शाएस्तेखान यह संग्रामदुर्ग को जीतकर चिन्तारहित एवं गर्वयुक्त होकर आगे प्रस्थान करके पुणे आकर निवास कर रहा है। हे पराक्रमी राजा! तू राजगढ़ पर है, ऐसा जानकर वह मन से अत्यन्त भयभीत होकर प्रायः वह उसी मार्ग से अपनी सेना को सह्याद्री से नीचे भेजेगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।